Parasnath yadav

गंवई राजनीति से संसद तक का सफर, सपा ने आज अपना सबसे मजबूत सिपाही खो दिया

यूपी के पूर्वांचल इलाके में ‘मिनी मुलायम’ कहे जाने वाले समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता पारसनाथ यादव का 71 साल की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया । सात बार विधायक, दो बार सांसद और चार बार यूपी में कैबिनेट मंत्री रहे पारसनाथ यादव लंबे समय से बीमार चले रहे थे । उनके निधन के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने शोक की लहर है । यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, पूर्व सीएम अखिलेश यादव, शिवपाल यादव सहित तमाम बड़े नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है ।

पारसनाथ यादव समाजवादी पार्टी से संस्थापक सदस्यों में से एक थे, उन्होंने पूर्वांचल इलाके में समाजवाद के पताके को ऊंचा रखने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी । पारसनाथ यादव वर्तमान में जौनपुर के मल्हनी से विधायक थे । जौनपुर के बरसठी थाना क्षेत्र के कारो बनकट गांव निवासी पारसनाथ यादव की गिनती मुलायम सिंह के करीबियों में होती है।

ग्राम प्रधान से संसद तक का सफर:
पारसनाथ यादव 1972 में बरसठी ब्लॉक के गहरपुर ग्राम सभा से पहली बार ग्राम प्रधान चुने गए थे, साल 1977 में पहली बार जिला पंचायत सदस्य बन गए और 1984 में पहली बार बरसठी विधानसभा से विधायक हुए। राजनीति का अखाड़ा पारसनाथ यादव ने बरसठी ब्लॉक से ही शुरू किया था । जौनपुर सदर लोकसभा सीट से वह दो बार सांसद भी चुने गये। साल 1998 में वह पहली बार सांसद बने, मगर जब एक साल बाद ही 1999 में चुनाव हुआ तो वह भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद से हार गये । हार के बाद पारसनाथ यादव निराश नहीं हुए और पांच साल बाद जब 2004 में लोकसभा का चुनाव हुआ तो उन्होंने तत्कालीन गृह राज्य मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद को हरा कर बदला ले लिया ।

जनता के बीच काफी लोकप्रिय थे पारसनाथ यादव
सपा विधायक पारसनाथ यादव जमीनी नेता थे, अपने सरल स्वभाव की वजह से जनता के बीच वह काफी लोकप्रिय थे । उन्होंने सपा के छोटे से छोटे कार्यकर्ताओं के दिल में अपनी जगह बनाई थी। वह जिले में और पार्टी में एक दबदबा रखते थे और गरीबों पिछड़ों की आवाज थे। जब इलाके में बाहुबली धनजंय सिंह का प्रभाव बढ़ने लगा, इस दौरान भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सपा कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम करते रहे । अपने कार्यकाल में उन्होंने जनहित से जुड़े कई विकास कार्यों को अंजाम दिया। आज जैसे ही उनके निधन की खबर आई, लोग उनके अंतिम दर्शन के लिये उनके आवास पर लोगों का तांता लग गया ।

ऐसे बने मुलायम के सबसे खास:
90 के दशक में मुलायम- पारसनाथ यादव की जनसभा आयोजित की गई थी । जनसभा के दौरान अचानक तेज आंधी आई और मंच के ऊपर लगे पाइप अचानक गिरने लगे। मुलायम सिंह को इससे चोट लग सकती था, तब पारसनाथ यादव ने मुलायम को गोद में उठा लिया और मंच से गिरने वाले पाइप को अपने शरीर पर गिरने दिया । इस घटना के वह मुलायम सिंह के और करीब हो गये।