Lalji Tondon (File Photo)

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का निधन, लखनऊ के मेदांता अस्पताल में ली आखिरी सांस

लखनऊ. मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का 85 साल की उम्र में मंगलवार तड़के निधन हो गया। 11 जून को सांस लेने में दिक्कत और बुखार के बाद लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले कुछ दिनों से लगातार उनकी तबीयत बिगड़ रही थी। लालजी टंडन के बेटे और यूपी सरकार में मंत्री आशुतोष टंडन ने मंगलवार की सुबह ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी। आशुतोष टंडन ने अपने ट्वीट में लिखा- बाबूजी नहीं रहे।

लालजी टंडन के किडनी और लिवर में परेशानी के बाद 13 जून को ऑपरेशन किया गया था। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया था। सोमवार की रात उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। मंगलवार की सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली।

 

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लालजी टंडन का राजनीतिक सफर: 
लालजी टंडन के राजनीतिक सफर की शुरुआत 1960 में हुई थी। वह दो बार पार्षद चुने गए और दो बार विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे । 1978 से 1984 और 1990 से 96 तक लालजी टंडन दो बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे। उन्होंने जेपी आंदोलन में भी बढ़- चढ़कर हिस्सा लिया था। 90 के दशक में भाजपा- बसपा गठबंधन की सरकार बनाने में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी। 1991 से 1992 की यूपी सरकार में वह मंत्री भी बने। 1996 से 2009 तक लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 1997 में फिर से वह नगर विकास मंत्री बने। 2009 में लखनऊ लोकसभा सीट से जीतकर पहली बार सांसद बने। लाल ली टंडन बीजेपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के करीबी माने जाते थे। 21 अगस्त 2018 को उन्हें बिहार के राज्यपाल बनाया गया। 20 जुलाई 2019 को उन्हें मध्यप्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।