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बिहार में बाढ़ से लाखों की आबादी प्रभावित, छह बांध टूटने के बाद बिगड़े हालात, नए इलाकों में घुसा पानी

पटना. बिहार में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच राज्य में बाढ़ से तबाही मची है। राज्य में बाढ़ से लाखों की आबादी प्रभावित है। पिछले 24 घंटे में छह बांध टूटने से हालात बिगड़ गये हैं। बाढ़ का पानी नये इलाकों में प्रवेश कर गया है। हजारों लोगों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। समस्तीपुर- दरभंगा रेल लाइन पर बाढ़ का पानी आ जाने के बाद रेल परिचालन बंद कर दिया है। एनएच- 28 पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और दरभंगा में बांध टूटने के बाद पानी से इस इलाके के कई प्रखंड डूब गये हैं। समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड के हायाघाट में मुंडा पुल का पिलर नंबर 16 बागमती के पानी में डूब गया। वहीं सुगौली-मझौलिया रेलखंड अंतर्गत पुल संख्या 248 के गार्डर को भी बाढ़ के पानी के छूने के बाद रेल प्रशासन ने कई ट्रेनों का परिचालन स्थगित कर दिया है।

छह बांध टूटने के बाद हालात बिगड़े
पश्चिमी चंपारण में सेमरा घाट के जमींदारी बांध टूट जाने से बेतिया- गोपालगंज मार्ग बाधित हो गया। पूर्वी चंपारण के भवानीपुर ढ़ाला के पास बांध टूटने से कई गांवों में पानी प्रवेश कर गया। दरभंगा के हनुमाननगर प्रखंड के पटोरी और बेनीपुर में भी बांध टूटने से हालत बिगड़ गये हैं। गोपालगंज के बैंकंठपुर प्रखंड में सारण तटबंध भी शनिवार को टूट गया। इससे पहले पुरैना देवापुर और पकहा में सारण तटबंध टूट चुका है। गोपालगंज के सैकड़ों गांव बाढ़ में डूब चुके हैं। इसके अलावा डुमरियाघाट अर्धनिर्मित पुल का एप्रोच ध्वस्त हो रहा है। इसके ध्वस्त होने से दिल्ली काठमांडू एनएच- 28 के डूबने का खतरा मंडरा रहा है।

बिहार की कई नदियां उफान पर
बागमती और गंडक नदी के अलावा कोसी की सहायक नदियां भी उफान पर है। गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। पूर्णिया में महानंदा का जलस्तर भी खतरे के निशाने से ऊपर बह रहा है।